ईसा मसीह, जिन्हें ईसाई धर्म में ईश्वर का पुत्र और मानवता का उद्धारक माना जाता है, उनके जीवन और शिक्षाओं का विस्तार से बाइबल में वर्णन किया गया है, विशेष रूप से न्यू टेस्टामेंट के चार सुसमाचारों—मत्ती, मरकुस, लूका, और यूहन्ना—में। सवाल यह है कि क्या ईसा ने कभी गलती की थी? इस प्रश्न का जवाब देने के लिए हमें ईसाई धार्मिक विचार, बाइबल के पाठ, और उसके अर्थ को समझना होगा। यह एक ऐसा विषय है जो धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाता है, और इसका जवाब व्यक्ति के विश्वास और व्याख्या पर निर्भर करता है।
ईसाई धर्म के अनुसार, ईसा को "निष्पाप" (पापरहित) माना जाता है। न्यू टेस्टामेंट में बार-बार यह दोहराया गया है कि ईसा ने अपने पूरे जीवन में कोई पाप या गलती नहीं की। इब्रानियों 4:15 में लिखा है, "क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं जो हमारी कमजोरियों में हमारे साथ दुखी नहीं हो सकता; बल्कि वह हर तरह से परीक्षा में पड़ा, परंतु पाप से रहित रहा।" इससे यह स्पष्ट होता है कि बाइबल के अनुसार ईसा को एक ऐसा व्यक्ति माना गया है जो परीक्षाओं से गुजरा, लेकिन उसने कभी गलती नहीं की। इसकी वजह यह दी जाती है कि वह ईश्वर का अवतार था और उसका जीवन मानव के लिए एक आदर्श था।
ईसा के जीवन के प्रसंग, जैसे उनका लोगों को उपदेश देना, चिकित्सा करना, और अपने शत्रुओं को भी प्रेम करना, यह दिखाते हैं कि उन्होंने हमेशा न्याय, दया, और सत्य के मार्ग का पालन किया। उदाहरण के लिए, जब उन्होंने एक व्यभिचारिणी महिला को बचाया (यूहन्ना 8:1-11), तो उन्होंने न केवल उसकी जान बचाई बल्कि उसे एक नई शुरुआत का मौका भी दिया, यह कहकर कि "जा, और अब से पाप मत कर।" इस तरह के कार्य उनकी गलती से परे होने की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
धार्मिक विचार के अलावा, यदि हम मानवीय दृष्टिकोण से सोचें, तो कोई कह सकता है कि ईसा के किसी व्यवहार में गलती ढूंढी जा सकती है—जैसे उनका मंदिर में व्यापारियों के खिलाफ गुस्सा दिखाना (मत्ती 21:12-13)। लेकिन ईसाई विचार में इसे गलती नहीं, बल्कि "धार्मिक क्रोध" माना जाता है, क्योंकि वह ईश्वर के घर की पवित्रता के लिए लड़ रहे थे। इसलिए, यह भी उनके निष्पाप होने का प्रमाण बन जाता है।
अंत में, ईसाई विश्वास के अनुसार, ईसा ने कभी गलती नहीं की क्योंकि वह ईश्वर और मनुष्य के रूप में एक सिद्ध व्यक्तित्व थे। उनका जीवन एक आदर्श था जो गलतियों से परे था। यह जवाब धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है, और यदि कोई अन्य दृष्टिकोण से इस पर विचार करता है, तो वह व्यक्तिगत विश्वास पर निर्भर करेगा। इस तरह, बाइबल के अनुसार और ईसाई परंपरा में, ईसा को निष्पाप और गलती से मुक्त माना जाता है।

