ईसाई मान्यता में यीशु को परमेश्वर का पुत्र कहा जाता है, लेकिन साथ ही उन्हें परमेश्वर का एक रूप भी माना जाता है। यह विचार "त्रिएक" (Trinity) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार परमेश्वर एक है, लेकिन तीन व्यक्तियों में प्रकट होता है: पिता, पुत्र (यीशु), और पवित्र आत्मा।
बाइबल में यीशु को "परमेश्वर का पुत्र" बार-बार कहा गया है। यूहन्ना 3:16 में लिखा है, "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।" यहाँ यीशु को परमेश्वर का पुत्र बताया गया है, जो मनुष्यों के उद्धार के लिए भेजा गया। लेकिन बाइबल यह भी कहती है कि यीशु केवल एक दूत या साधारण मनुष्य नहीं थे, बल्कि उनके पास दैवीय स्वरूप था।
यूहन्ना 1:1-2 कहता है, "आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।" आगे यूहन्ना 1:14 में लिखा है, "वचन देहधारी हुआ और हमारे बीच में डेरा किया।" ईसाई मानते हैं कि यह "वचन" यीशु ही है, जो परमेश्वर का अवतार बनकर धरती पर आया। इससे पता चलता है कि यीशु परमेश्वर का हिस्सा हैं, न कि केवल उनका पुत्र। यह विचार यीशु की दोहरी प्रकृति को दर्शाता है—वह पूर्ण रूप से परमेश्वर और पूर्ण रूप से मनुष्य दोनों हैं।
यीशु ने स्वयं भी अपने दैवीय स्वरूप का दावा किया। यूहन्ना 10:30 में वे कहते हैं, "मैं और पिता एक हैं।" यह वचन यह संकेत देता है कि यीशु और परमेश्वर पिता में कोई मूलभूत अंतर नहीं है; वे एक ही सार (essence) के हैं। साथ ही, यूहन्ना 14:9 में यीशु कहते हैं, "जो मुझे देखता है, वह पिता को देखता है।" ये कथन उनके परमेश्वर होने की पुष्टि करते हैं।
हालांकि, कुछ लोग पूछते हैं कि अगर यीशु परमेश्वर हैं, तो वे पिता से प्रार्थना क्यों करते थे (जैसे मत्ती 26:39 में)? इसका जवाब त्रिएक के सिद्धांत में है—यीशु, पिता और पवित्र आत्मा एक हैं, लेकिन उनकी भूमिकाएँ अलग हैं। धरती पर यीशु ने मनुष्य का रूप लिया और उद्धार के लिए पिता की इच्छा को पूरा किया। उनकी प्रार्थना उनके मनुष्य स्वरूप और पिता के प्रति आज्ञाकारिता को दर्शाती है, न कि उनकी दैवीयता को नकारती है।
फिलिप्पियों 2:6-7 कहता है कि यीशु "परमेश्वर के स्वरूप में थे," लेकिन उन्होंने मनुष्य का रूप लिया। इससे उनकी दैवीय और मानवीय प्रकृति दोनों स्पष्ट होती हैं। ईसाई मानते हैं कि यीशु परमेश्वर हैं, जो पुत्र के रूप में मनुष्य बनकर आए, ताकि पापों की क्षमा और उद्धार का मार्ग खोल सकें।
निष्कर्ष में, बाइबल के अनुसार यीशु न केवल परमेश्वर के पुत्र हैं, बल्कि परमेश्वर स्वयं भी हैं। वे त्रिएक का हिस्सा हैं—पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा—जो एक ही परमेश्वर में एकजुट हैं। यह रहस्यमयी सत्य ईसाई विश्वास का आधार है, जो यीशु को भगवान और उनके बेटे दोनों के रूप में देखता है।

