धन्य ( मत्ती 5:3-12 )



 3 “धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं,

क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है।

4 “धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं,

क्योंकि वे शान्ति पाएँगे।

5 “धन्य हैं वे, जो नम्र हैं,

क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे।(भज. 37:11)

6 “धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं,

क्योंकि वे तृप्त किए जाएँगे।

7 “धन्य हैं वे, जो दयावन्त हैं,

क्योंकि उन पर दया की जाएगी।

8 “धन्य हैं वे, जिनके मन शुद्ध हैं,

क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे।

9 “धन्य हैं वे, जो मेल करवानेवाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएँगे।

10 “धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं,

क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है।

11 “धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें और सताएँ और झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। 12 आनन्दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा प्रतिफल है। इसलिए कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहले थे इसी रीति से सताया था।






मत्ती 5:3-12

         में यीशु नौ "आशीर्वाद" (धर्मोपदेश) देता है, जो उन लोगों की विशेषताओं का वर्णन करते हैं जो परमेश्वर के राज्य में धन्य होंगे। ये आशीर्वाद उन लोगों के विपरीत हैं जो दुनिया में धन्य माने जाते हैं।


आइए इन आशीर्वादों को थोड़ा विस्तार से देखें

* 1.मन के दीन:  वे जो अपने आप को तुच्छ समझते हैं और परमेश्वर पर पूरी तरह से निर्भर करते हैं।

* 2. शोक करते हैं: वे जो अपने पापों और दुनिया की बुराई के लिए दुखी हैं।

* 3. नम्र: वे जो घमंडी नहीं हैं और दूसरों को अपने से ऊँचा मानते हैं।

* 4. धार्मिकता के भूखे और प्यासे: वे जो परमेश्वर की इच्छा को जानने और उसका पालन करने के लिए उत्सुक हैं।

* 5. दयावन्त: वे जो दूसरों के प्रति दयालु और क्षमाशील हैं।

* 6. मन शुद्ध: वे जिनके विचार और इरादे शुद्ध हैं।

* 7. मेल करवानेवाले: वे जो शांति स्थापित करने और लोगों को एकजुट करने का प्रयास करते हैं।

* 8. धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं: वे जो परमेश्वर की इच्छा के लिए कष्ट सहते हैं।


यीशु इन लोगों को धन्य क्यों कहता है?

* वे परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करेंगे: यह सबसे बड़ा आशीर्वाद है जो कोई भी प्राप्त कर सकता है।

* वे शांति पाएंगे: वे जो शोक करते हैं और नम्र हैं, उन्हें परमेश्वर से आंतरिक शांति मिलेगी।

* वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे: भविष्य में, वे धरती पर शांति और खुशी के साथ रहेंगे।

* वे तृप्त किए जाएंगे: वे जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं, उन्हें परमेश्वर से पूर्णता मिलेगी।

* उन पर दया की जाएगी: वे जो दयालु हैं, उन्हें परमेश्वर और दूसरों से दया मिलेगी।

* वे परमेश्वर को देखेंगे: वे जिनके मन शुद्ध हैं, उन्हें परमेश्वर के साथ एक विशेष संबंध मिलेगा।

* वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएँगे: वे जो मेल करवानेवाले हैं, उन्हें परमेश्वर के परिवार का हिस्सा बनने का विशेषाधिकार मिलेगा।

उन्हें स्वर्ग में बड़ा प्रतिफल मिलेगा: वे जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं, उन्हें परमेश्वर से अनन्त पुरस्कार मिलेगा।

यीशु इन आशीर्वादों के साथ एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी देता है 

उन लोगों को धन्य कहा जाएगा जो उसके कारण सताए जाते हैं यह उन लोगों के लिए एक चुनौती है जो यीशु का अनुसरण करना चाहते हैं। उन्हें कष्ट और उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन उन्हें आनन्दित होना चाहिए क्योंकि उन्हें स्वर्ग में बड़ा प्रतिफल मिलेगा।


**निष्कर्ष:**

यीशु के ये आशीर्वाद हमें सिखाते हैं कि परमेश्वर की दृष्टि में क्या महत्वपूर्ण है। यह उन लोगों को धन्य कहता है जो विनम्र, दयालु, और धार्मिकता के लिए भूखे और प्यासे हैं। वे जो यीशु का अनुसरण करते हैं, उन्हें इस जीवन में कष्ट सहना पड़ सकता है, लेकिन उन्हें स्वर्ग में अनन्त पुरस्कार मिलेगा।

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